How to win a debate, debate jitne ke treeke
वो कहते हैं कि इंसान का धैर्यवान होना बहुत ज़रूरी है, धैर्य रख कर इंसान हर मुश्किल, हर परिस्थिति से बाहर निकल सकता है, और उन मुश्किलों से जीत भी जाता है, परंतु वही एक अधैर्यशील इंसान जीती हुई बाज़ी भी हार जाता है और खुद को मुश्किल में डाल लेता है।
वो कहते हैं कि धैर्यवान इंसान मुश्किल की घड़ी में भी धैर्य रखता है जिससे उसे कोई न कोई रास्ता या विकल्प उस घड़ी से निकलने का मिल ही जाता है और वह उसका इस्तेमाल करके अपने आप को मुश्किल घड़ी से निकाल लेता है, परंतु एक अधैर्यशील इंसान सामने रास्ता होते हुए भी उस पर ठीक तरह से नहीं चलता, और खुद के लिए मुश्किल खड़ी करता चलता है, जिससे उसकी मुश्किलें सिर्फ बढ़ती हैं और उसे और ज़्यादा अधैर्यशील बनाती हैं।
वो कहते हैं कि धैर्यवान इंसान धैर्य रखता है, जिसके वजह से वह परिस्थिति का आकलन सही तरह से कर लेता है और सही फैसला भी करता है, पर एक अधैर्यशील इंसान सब कुछ जल्दी-जल्दी करना चाहता है और ऐसे में गलतियों होने के चांस बढ़ जाते हैं, और ज़्यादा गलतियाँ होती हैं।
इसलिए इंसान को हर घड़ी में शांत और धैर्यवान होना चाहिए जिससे वह मुश्किल का सही आकलन कर सके, सही रास्ते को पहचान सके, सही रास्ते पर चलने का फैसला कर सके, सही तरीके से चले, और गलती होने के मौके भी कम करे, जिससे कि वह भी मुसीबत से निकल जाए।
रावाणियत में एक रिक्वेस्ट आती है जिसमें हमारे क्लाइंट लिखते हैं कि –
“बहुत जल्दी मेरी एक डिबेट होने वाली है, और वह एक बड़े लेवल की डिबेट है, और मेरा उसे जीतना बहुत ज़रूरी है, मैंने सब तैयारी कर ली है, पर मैं एक बार तुमसे सलाह लेना चाहता हूँ, क्या कोई ऐसी बात है जो मुझे ध्यान में रखनी चाहिए? अगर ऐसी कोई बात हो तो मुझे बताओ!”
हम उन्हें जवाब में लिखते हैं –
यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है कि आप हमारी सलाह को इतना महत्वपूर्ण समझते हैं और अपनी जिंदगी के ऐसे बड़े फैसले लेने से पहले हमसे सलाह लेते हैं। पर हम केवल सलाह देते हैं, उसे मानना है या नहीं मानना है इसका फैसला आपको ही करना होता है।
डिबेट में आप जिसके भी खिलाफ हों, जब भी बोले तो बिलकुल ध्यान से सुनना।
जवाब देने में कोई जल्दी मत करना, धीरे और आराम से, धीरे से मतलब है बोलने का लहजा धीमा हो, आवाज़ ऊँची न रखे, आराम से का मतलब है बहुत जल्दी नहीं बोले, आराम से बोले। ऐसा करने से आप सामने वाले को उसकी धैर्य की सीमा तक पहुँचा देंगे।
किसी भी सूरत में किसी भी हाल में अपना धैर्य न खोएं, डिबेट में जो पहले धैर्य खो देता है, वह हार जाता है।
हर जवाब मुस्कुराते हुए और हँसते हुए दें, हर बात को सुनते वक्त चेहरे पर एक मुस्कान रखें। ऐसा करने से सामने वाला जटिल सोच में फँस जाता है, और धैर्य खो देता है, अंत में वह गलतियाँ करना शुरू कर देता है, और जो आपके लिए बहुत फायदे मंद होती हैं।
अगर आप आईने के सामने बैठ कर इन सब बातों को प्रैक्टिस कर लें तो बहुत बेहतर होगा। इससे आपको डिबेट में ये सब चीजें करने में मुश्किल नहीं होगी, क्योंकि ये सब आपके लिए नया नहीं रह जाएगा।