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How to move on forever aftre

वो कहते हैं कि ज़िंदगी दुखों से भरी हुई है। यहाँ एक ऐसा दुख भी होता है कि आप जिसे चाहते हैं, वह कुछ और चाहता है। आप उसके साथ रहना चाहते हैं, पर वह कुछ और चाहता है। ऐसी स्थिति में आपके पास दो ही विकल्प होते हैं।पहला कि आप स्वाभाविक रूप से अपनी इच्छा ज़ाहिर करें और आप उन्हें जाने दें, जो वे करना चाहते हैं उन्हें करने दें। यह दुःखदायी है, परन्तु यही उत्तम है क्योंकि इसमें आपका मान, स्वाभिमान और सम्मान सभी बच जाते हैं।

दूसरा विकल्प है कि आप उन्हें रोकने की कोशिश करें और उनके जाने का विरोध करें। इससे केवल आपका मान घटता है, स्वाभिमान को नुकसान होता है और सम्मान खत्म हो जाता है, क्योंकि जिसे जाना है वह तो जाता ही है। वह फैसला कर चुका होता है जाने का, वह नहीं रुकता। ऐसे में उसे रोकने के लिए किए गए सभी प्रयास निष्फल हो जाते हैं, और उन सभी प्रयासों के निष्फल होने से एक नया दुख जन्म लेता है।

उसके जाने पर आपको होने वाला दुख ज़ाहिर करना, और उसका उन भावनाओं को नकारते हुए आपको छोड़ जाने के फैसले पर अटल रहना, यह बहुत बड़ा दुःख का कारण बनता है। ऐसे में आपकी इच्छा से या इच्छा के विरुद्ध वह चला जाता है। दूसरा विकल्प वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी दर्द और अपमान का कारण बनता है।

जाने वाले ने फैसला कर लिया होता है, यहाँ तक कि वह यह भी सोच चुका होता है कि जब आप उसे रोकेंगे तो वह किस तरह से आपको नकारेगा। वे सभी स्थिति, परिस्थिति को पहले से बेहतर समझकर उनसे निकलने के सभी उपायों को समझकर तैयार होते हैं। वे अपने अनूठे सभी हठता देते हैं और अंत में अगर सभी हठता नकार दिए जाएँ तो वे अपनी जिद से चले जाते हैं। हम उन्हें किसी भी सूरत में रोक नहीं पाते।वो कहते हैं कि जब आपका कोई करीबी आपसे दूर जाने की बात करे तो उसे जाने दें, क्योंकि वे पहले ही जा चुके होते हैं, वे बात बाद में बताते हैं। वो कहते हैं कि वे अपने ध्यान में आपको यह बात बहुत बार बता चुके हैं, साथ ही साथ हर बार आपके सवाल और उनके जवाब, फिर उनके बाद आने वाले सवाल और उनके जवाब, और फिर उसके बाद भी आपका हट करना और उस समय भी उनके हठता, वे सभी को बहुत पहले से कई बार अपने ध्यान में करते आ रहे हैं। और वे अपने ध्यान में जो ज़िंदगी आपसे दूर होकर जीना चाहते हैं, उसे जी रहे होते हैं, पर वर्तमान में सिर्फ आपके लिए उस दुनिया और ज़िंदगी को और उनमें जी रहे लोगों को सिर्फ आपके लिए नहीं छोड़ा जा सकता। साथ ही साथ न तो वे उन्हें छोड़ना चाहते हैं और यह उनके लिए भी बहुत तकलीफदायक होता है और वे इस तकलीफ़ के डर से आपको छोड़ देना बेहतर समझते हैं, बल्कि उस दुनिया को उनके ध्यान में…वो कहते हैं कि जब आपके साथ ऐसा हो तो आप उन्हें सज्जता से जाने दें, आपको होने वाली दर्द को उनके आगे प्रदर्शित न करें। अपनी सारी आंतरिक ताकत लगाकर अपनी भावनाओं को अपने भीतर ही रोक लें, अपना संयम बनाए रखें। उस इंसान का जाना बहुत ज्यादा तकलीफ़ भरा होता है और इस तकलीफ़ को किसी भी तरह से टाला नहीं जा सकता। वे आगे कहते हैं कि परन्तु उन्हें अपनी भावनाएँ प्रदर्शित करना और रोकने के प्रयास केवल अपमान का कारण बनते हैं, इससे दुख में केवल वृद्धि होती है।

वो कहते हैं कि ऐसा सभी के साथ होता है, सभी प्रयास करते हैं पर विफल होते हैं। वे कहते हैं कि “मैं भी विफल हुआ हूँ” इसलिए अब मैं बाकी सभी को बताना चाहता हूँ कि उन्हें ऐसी घढ़ी में क्या करना चाहिए। उन्हें जाने दो, उनके भावनाओं को व्यर्थ न करें, अपने पर संयम रखें, उनकी तकलीफ़ का कारण मत बनो।

इसी तरह की एक रिक्वेस्ट किसी ने भेजी है जिसमें वे लिखते हैं – “मेरा बेटा मुझे छोड़कर जाना चाहता है अपनी जॉब और करियर के सिलसिले में, पर मैं नहीं चाहता कि वह मुझे छोड़कर जाए, पर मैं यह बात भी जानता हूँ कि अगर मैं उसे रोकूं भी तो वह नहीं रुकेगा। मैं उसके जाने के बाद बिलकुल अकेला हो जाऊंगा, मेरी अपनी भी बहुत पहले ही जा चुकी है। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूँ, मुझे इस अकेली ज़िंदगी से डर लगता है, पर मैं किसी से कुछ कह नहीं पा रहा हूँ। मेरे बेटे और उसके परिवार के जाने के बाद मैं बिलकुल अकेला हो जाऊंगा। कहाँ मैं क्या करूँ? उसे रोक भी नहीं सकता और जाने भी नहीं देना चाहता।“

तो जो जवाब मैंने उन्हें लिखा वह मैं लिखने जा रहा हूँ -मुझे यह बात बहुत खुशी देती है कि आप मुझे इतना प्यार करते हैं कि आपने दिल की बिल्कुल पास वाली बात मुझे बताई। आप अपने बेटे को जाने दो, मुझे भी एक ऐसे पिता के साथ रहना है। आप मेरे साथ रहिए। हम साथ में खाना बनाएंगे, साथ में खाना खाएंगे, रोज थोड़ी हंसी-मजाक, थोड़ा नोक-झोंक और इसी तरह वक्त बिताएंगे।

आपके बच्चे और उनके परिवार के अच्छे भविष्य के लिए अगर उन्होंने जाने का फैसला किया है तो उन्हें जाने दीजिए। अगर उन्हें लगता है कि वहां वो एक अच्छी ज़िंदगी गुज़ारेंगे तो जाने दीजिए।आप रवानीयत आइए, मुझसे भी यह अकेले नहीं संभलती, मैं आपका इंतजार कर रहा हूँ।

रावाणियत में आने के लिए कोई खास वजह की ज़रूरत नहीं, जिसका दिल जब करे तब आए।

रावाणियत आपका घर है, रवान खान आपका बच्चा है, दोस्त है, साथी है…`;

 

 

 

 

 

 

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