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How to achive goal, how to make dreem come true

वो कहते हैं कि आप अगर किसी काम को करना चाहते हैं तो वो हो जाता है — सब कुछ अपने आप उस कसम के मुताबिक होता चलता है — वक़्त, परिणाम, माहौल आदि। कोई काम नहीं हो पाता तो सिर्फ़ इस वजह से कि आप उसे करना नहीं चाहते हैं। वो कहते हैं कि जब आप किसी काम को नहीं करना चाहते तो आपको अपने ही फ़ेवर में बहाना मिल ही जाता है। तो वो कहते हैं अगर आप सच में कोई काम करना चाहते हैं तो उसे अपनी प्राथमिकता बनाइए, जब वो प्राथमिकता बन जाएगा तब वो काम भी हो जाएगा।

इसी तरह एक रिक्वेस्ट हमारे पास आई, जिसमें हमारे दोस्त कहते हैं कि, “मैं एक काम बहुत समय से करना चाहता हूँ पर कर नहीं पाता हूँ, कभी वक़्त सही नहीं लगता तो कभी किसी समस्या में फँस जाता हूँ, कभी कुछ हो जाता है तो कभी कुछ… मैं अपने ड्रीम वर्क को सिर्फ़ सपनों में ही कर पाता हूँ, पर वो कहता है कि वो सही समय का इंतज़ार कर रहा है लेकिन सही समय आ नहीं रहा, और जब आता है तो मैं किसी और चीज़ में बिज़ी हो जाता हूँ… तो मौक़े दूसरे दरवाज़े पर चले जाते हैं… मुझे क्या करना चाहिए?”

ये कोई बहुत बड़ी परेशानी नहीं है, ये तक़रीबन सबके साथ है। हम सभी को लगता है कि अभी सही समय नहीं आया है, और हम हमेशा सही समय का इंतज़ार करते हैं। अगर सही मायनों में समझा जाए तो हम सभी परिस्थितियों के अपने फ़ेवर में होने का इंतज़ार करते हैं, पर ऐसा कभी नहीं होता। और जब सारी परिस्थितियाँ हमारे फ़ेवर में हो भी जाएँ तो कोई न कोई समस्या आ जाती है। यहाँ पर “समस्या” असल में समस्या नहीं है, क्योंकि तुम मानसिक रूप से उस काम को करने के लिए खुद तैयार नहीं हो। तुमने उस काम को अपने मन में “बाद के लिए” तय कर रखा है। इसलिए तुम्हारा मन अवचेतन रूप से जब भी तुम उस काम के बारे में सोचते हो, तो “बाद में करने” का विचार या कोई और तरह का ध्यान भंग (डायवर्ज़न) बना देता है, जिससे वो काम हो नहीं पाता।

देखिए, अगर आप किसी काम को करना चाहते हैं तो सबसे पहले उसे अपनी प्राथमिकता बनाइए — आपने देखा होगा कई लोग किसी काम को करने की ठान लेते हैं तो वो उसे कर ही देते हैं, और जब तक वो काम नहीं हो जाता, वो शांत नहीं रहते — चाहे परिस्थितियाँ उनके फ़ेवर में न हों या वक़्त ठीक न हो या कोई और समस्या हो, लेकिन वो उस काम को करते हैं, या थोड़ी देर रुक कर, पर वो उस काम को कर ही देते हैं। ऐसा इसलिए कि वे उसे अपनी प्राथमिकता मानते हैं और अवचेतन रूप से अपने मन में उसे स्थापित कर लेते हैं, जिससे अवचेतन मन उन्हें बार-बार प्रेरित करता है कि यह काम करो, यह काम करो, यह करना है, इसे जल्दी करो — और उसी तरीके से काम हो जाता है।

अगर आप किसी काम को करना चाहते हैं तो उसे प्राथमिकता बनाने से पहले यह समझ लें कि वो सच में सही और अच्छा काम है या नहीं, भविष्य में उससे लाभ होगा या हानि। जिन कामों से हानि हो, उन्हें न करें। जो काम लाभकारी हों, अच्छे और उज्जवल भविष्य वाले हों, उन्हें ही अपनी प्राथमिकता मानें — आपके काम हो जाएँगे।

 

 

 

 

 

 

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