The reason behind the increasing crime, how to stop crime
रावाणियत हर एक के लिए, और यहाँ किसी पर कोई पाबन्दी नहीं, सब अपनी राय रख सकते हैं, सब अपनी पसंद बता सकते हैं, या सुनने के लिए हम यहाँ। अगर तुम रूठ जाओ तो मनाने के लिए हम हैं, यहाँ तुम्हारा गुस्सा हम सहेंगे, तुम्हारा कटाक्ष हम सुनेंगे, तुम्हारे ताने हम सुनेंगे, तुम्हारा दुख हम समझेंगे, तुम जैसे कहोगे हम वैसे चलेंगे, तुम कहोगे हम वैसा करेंगे.. रावाणियत बनी ही इसलिए है… रावाणियत का मकसद ही यही है..
हमारे एक साथी हमें रिक्वेस्ट भेजते हैं, वे लिखते हैं – “I can’t reveal myself but can you tell me why the crime is increasing day by day? And how to stop it?”
हमारे दोस्त लिखते हैं कि वो अपने बारे में नहीं बता सकते पर वो हमसे एक सवाल पूछते हैं, वो कहते हैं जब हमारा दोस्त कहदे मुझसे मत पूछो तो मत पूछो, पूछने पर उसे तकलीफ हो सकती है, पर वो जवाब नहीं देना चाहते हैं, उनके पास इसके अपने कारण हैं, उनकी भावनाओं की कदर करनी चाहिए, और उन पर जवाब देने का जोर नहीं डालना चाहिए, रावाणियत, और हम उन्हीं के बताए रास्तों पर चलने की कोशिश करते हैं.. हम अपने दोस्त पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं डाला – जो वो नहीं बताना चाहते तो न पूछना ही सही लगा..
हमारे दोस्त के सवाल का जवाब देना हमारे लिए जरूरी है। तो जो सबसे अच्छा जवाब हम दे सकते थे हमने उन्हें बताया –
हमने लिखा कि वो कहते हैं कि लोगों को आपस में मिलना चाहिए, बातें करनी चाहिए, लोगों को एक दूसरे के साथ वक्त बिताना चाहिए, वो कहते हैं कि ऐसा करने से लोगों का प्यार बढ़ेगा, लोगों में जान पहचान बढ़ेगी, लोगों में अपनापन बढ़ेगा, ज्यादा लोग एक दूसरे को जानेंगे और बहुत दूर तक लोग एक दूसरे को जानेंगे, जिससे कि क्राइम की करने की हिम्मत टूट जाती है क्योंकि वहां क्रिमिनल को डर रहता है कि कोई न कोई उसकी जान पहचान वाला मिल जाएगा, वो कहते हैं पुराने लोग मिलनसार थे और एक दूसरे से जान पहचान रखते थे इसलिए पहले इंसान को क्राइम करने से डर लगता था क्योंकि इससे उसकी बदनामी हो जाती थी और अगर उसे बहुत लोग जानते हैं और दूर तक जानते हैं इसलिए इंसान के भीतर इस डर की वजह से वो क्राइम नहीं करता, साथ ही उसे बहुत लोग जानते, क्राइम करने के बाद उसे आसानी से लोग पहचान लेंगे या पकड़ लिया जाएगा, इंसान के भीतर ये डर होता है।
फिर जब ऐसे में कोई क्राइम करने से पहले इस बात का भी डर होता कि जो विक्टिम होता है उसे भी जानने वाले बहुत लोग होंगे, उसे भी पहचानने वाले लोग होंगे उसके अपने होंगे जो उसका साथ देंगे ऐसे में क्राइम करने की हिम्मत नहीं मिल पाती..
वे कहते हैं कि पर जब लोग काम में बहुत ज्यादा बिजी हो जाते हैं और आपस में मिलन जुड़ना बंद कर देते हैं तो वह क्राइम करने वाले की हिम्मत बढ़ाते हैं.. क्योंकि जो क्राइम कर रहा है या करने की सोची है वो अपने घर के आस-पास न होकर दूर जाता है जहां उसे कोई नहीं जानता, जहां उसे कोई नहीं जानता वहां उसे बदनामी का डर या पहचान हो जाने का डर नहीं होता साथ ही साथ जब विक्टिम भी ऐसा हो कि जिसे कोई जानता हो तो उसकी मदद करने वाले लोग भी कम होते हैं, क्योंकि बाकी सभी लोगों के लिए वे दोनों अन्जान होते हैं, कोई भी दो अन्जान लोगों के बीच खुद को नहीं फसाना चाहता और यह बिलकुल सही भी है क्योंकि कोई किसी अन्जान के लिए अपने आप को मुश्किल में डालना नहीं चाहता, जब उसे खुद को बचाने वाला भी कोई नहीं, क्योंकि वे भी बहुत ज्यादा मिलनसार नहीं, या उन्हें बहुत लोग जानते नहीं हैं जो उनकी मदद कर सके, ऐसे में लोग जिन्हें लोग जानते हैं और उनकी मदद करने के लिए उनके जमकर लोग होते हैं वे ही लोग मदद करते हैं, और ऐसे लोग बहुत कम हो गए.. क्योंकि सभी सिर्फ अपनी जिंदगी में बहुत ज्यादा बिजी हो गए, वे जानते ही नहीं कि उनके बाजू के मकान में कौन रहता है, या उनके मकान के बाजू के मकान या पिछली गली के तीसरे मकान के पीछे वाली गली में कौन रहता है, पर पहले लोग एक दूसरे को किलोमीटर दूर तक जानते थे, साथ ही साथ लोगों के जानकारों की जानकारी में पता लगा लिया करते थे, पर अब लोग एक दूसरे को जानते ही नहीं हैं…
वे कहते हैं कि क्राइम बढ़ने की असली वजह लोगों का सोशल गेदरिंग कम कर देना है लोग बहुत ज्यादा रिज़र्व हो चूके हैं, इसलिए वे मुश्किल में किसी को मदद के लिए भी नहीं बुला सकते और यह बात क्रिमिनल का हौसला बढ़ाती है, वे कहते हैं लोग इतने ज्यादा बिजी हैं कि उनके पड़ोस में जो है वो क्या काम करते हैं ऐसा जानते भी नहीं, ऐसे नए क्रिमिनल को डर लगना बंद हो जाता क्योंकि अगर वो क्राइम करके आ जाता है तो किसी को पता ही नहीं चलेगा.. क्योंकि कोई उसे जानता ही नहीं है.. फिर अगर किसी को पता चल जाए तो वो बताए किसी को क्योंकि लोग आपस में मिलते नहीं हैं तो विचारों का आदान-प्रदान भी नहीं हो पाता.. तो कोई किसी को बता ही नहीं पाता जिससे कि बाकी लोग सावधान नहीं हो पाते..
वे कहते हैं कि सोशल गेदरिंग का लगातार कम होते जाना क्राइम लगातार बढ़ते जाना है..
वे कहते हैं इंसान को वक्त निकाल कर सोशल गेदरिंग करते रहना चाहिए, जब सोशल गेदरिंग बढ़ने लगेंगे क्राइम कम होते चला जाएगा..