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How to choose right candidate.

the way to find a good man, the right man, how to select a right man

वो कहते हैं कि इंसान केवल फायदे देखता है, नुकसान नहीं। इसलिए वो कहते हैं कि हर चीज़ में, जो इंसान को दी गई है, उसके अपने नुकसान भी होते हैं और फायदे भी। वो कहते हैं कि पेट के भरने से संतुष्टि मिलती है, परन्तु पेट कभी भरता नहीं है। वो कहते हैं कि आंखें सब कुछ देखती हैं और यही इंसान के भटकने का कारण भी बनती हैं। वो बताते हैं कि इंसान एक मूल उद्देश्य लेकर घर से निकलता है, लेकिन ये आंखें उसे भटका देती हैं और वह अपने मुख्य उद्देश्य के अलावा और भी सारी चीजों को देखता है जिससे वह अपने मुख्य उद्देश्य को भूल जाता है, या फिर अपने मुख्य उद्देश्य में और सारी चीजें जोड़कर उसे एक कुछ अलग बना लेता है जो उसे पहले से बेहतर लगता है। वह और बेहतर और बेहतर के लिए भागता रहता है, पर उसका यह बेहतर बेहतर नहीं होता क्योंकि नई चीजें जुड़ने से फायदे तो जुड़ते हैं, पर नुकसान भी जुड़ जाते हैं। अब हमें ज़्यादा वक्त लगता है, और हमें हर बार कुछ नया दिख जाता है। इस तरह, बहुत बार सही चीज़ या जिस चीज़ का हम घर से इरादा करके निकले थे, वह नहीं ले पाते।

वो कहते हैं कि इंसान घर निकलता है अच्छे इरादे और एक अच्छे फैसला के साथ, पर जब हमारी आंखें बहुत कुछ देखती हैं, तो वे मन को भटका देती हैं।

वो कहते हैं कि इसलिए संत महात्मा आंखें बंद करके तपस्या करते हैं, जिससे उनका मन न भटके और वे अटल बने रहें। कहते हैं कि जब इंसान मन के भटकने को रोकना चाहता है तो उसे आंखें बंद कर लेनी चाहिए ताकि वह दुनिया की सुंदरता न देखे, न और चीजें देखे जिससे उसका मन भटके।

वो कहते हैं इंसान आंखों से देखता है और फिर उसे पाने की इच्छा करता है, और इस तरह से जो सही है, उसे छोड़कर बाकी सब पाने की इच्छा करता है।

वो कहते हैं कि जो असल में सबसे ज़रूरी होता है उसे छोड़ देते हैं जिससे जो हम चाहते थे वह नहीं हो पाता, उसमें कुछ फ़र्क़ हो जाते हैं। फिर जो हम हासिल करना चाहते रहे, हम वह हासिल नहीं कर पाते, उसमें भी फ़र्क़ हो जाता है। इसी कारण जोखिम उठाने के मामले में भी बदलाव होता है, और बाद में यह हमारी निराशा का कारण बनता है।

हमारे ऑफिस में एक क्लाइंट आए थे। उनके चेहरे पर ही परेशानी देखी जा सकती थी। मैंने उनसे बिना कुछ पूछे उन्हें बैठने के लिए कहा, पानी दिया, और उसके बाद पूछा कि क्या उन्हें कुछ और ज़रूरत हो तो बताएं। वे परेशान थे, ये तो मान लेना था कि परेशानी का कारण उन्होंने अभी तक न बताया था, और मैंने अभी पूछना सही नहीं समझा। उन्होंने मुझसे विनम्र भाव से कहा, “नहीं, मुझे कुछ नहीं चाहिए, और अगर आप बैठ गए हैं तो बात शुरू करें, या अगर आपको कोई और काम हो तो आप वह कर लीजिए, क्योंकि मुझे आपका वक्त चाहिए, और जब मैं बताना शुरू करूँगा तो उसके बाद मुझे बीच में कोई विघ्न ना हो।“ उनकी आंखों में सच्चाई थी। जब इंसान बहुत विनम्रभाव से और बहुत सब्र से बैठा हो, तो इसका मतलब है कि वह किसी गंभीर समस्या को मन में लिए बैठा है। हमें हमेशा दूसरे के जज़्बातों की कदर करनी चाहिए, और जब वे किसी समस्या में हों तो सबसे ज़्यादा ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें कहीं ऐसा न लगे कि उनकी भावनाओं को चोट पहुंचाई जा रही हो। मैंने अच्छे से बैठकर उनसे कहा, “आप मुझे अपनी बात बताएँ, जो मेरे बस में होगा वह मैं आपके लिए करूंगा।

“उन्होंने बताना शुरू किया, “मैंने कुछ वक्त पहले एक रेस्टोरेंट शुरू किया था, जिसके लिए मैंने अपनी सारी पूंजी लगाई थी और साथ ही बहुत कर्ज़ भी लिया था। शुरू के कुछ दिनों तक परेशानी झेलनी पड़ी, फिर बिज़नेस चलने लगा। बिज़नेस को चलता देखकर मैंने उसमें और पूंजी निवेश किया, जिसके लिए और कर्ज़ लिया। परन्तु उनके और उनके कर्मचारियों के बीच विवाद होने लगा, जिसके कारण कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी। फिर मुझे अच्छे कर्मचारियों की कमी हुई और कई समस्याओं के कारण मैंने आठ महीने पहले वह बिज़नेस बंद कर दिया।

“”अब मैंने नया बिज़नेस शुरू करने की सोची है, पर इस बार नौकरी पर रखने से पहले इंटरव्यू लेने की योजना है। मैं यहां यह जानने आया हूँ कि किस तरह से इंटरव्यू करना चाहिए ताकि मुझे ऐसा सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी मिले जो मेरे व्यवसाय को अच्छी स्थिति में ले आए।

“मैंने उनसे कहा, “आपके कर्मचारी वही करेंगे जो आप उन्हें बताएँगे। जो काम आप अकेले नहीं कर सकते, वे उसमें आपकी मदद करेंगे। इसलिए उन्हें कर्मचारियों से ऊपर उठाकर पार्टनर्स समझिए। आप अपने व्यवसाय को लीड करेंगे। आपके हाथ में स्टीयरिंग होगी, आप ड्राइव कर रहे होंगे और बाकी लोग सपोर्ट करेंगे। इसलिए यह उम्मीद करना कि आपके कर्मचारी ही सब कुछ करेंगे, गलत है। पर यह बात ठीक है कि आपके साथ काम करने वाले लोगों का मेहनती, ईमानदार और समर्पित होना बेहद ज़रूरी है, वरना यह बिज़नेस डूब सकता है।

“उन्होंने कहा, “बस यही डर मुझे सताता है कि फिर से वही गलती न हो और बिज़नेस डूब जाए। किसी को देखकर कैसे पता किया जाए कि वह पैशनेट है या ईमानदार? कोई कहेगा कि वह बहुत पैशनेट और ईमानदार है।“तो हमने उन्हें सलाह दी, “इंसान का पैशन या ईमानदारी एक नजर में नहीं दिखती बल्कि लगातार देखते रहने से उनका पता चलता है। एक जिम्मेदार इंसान की पहचान कुछ ही समय में हो जाती है। इसलिए ऐसे लोगों को चुनिए जिन्हें जिम्मेदारी की समझ हो, क्योंकि जिन्हें जिम्मेदारी का ज्ञान होता है, वे उसे पूरा करने की सोचते और करते हैं।“वे मेरी बात से सहमत हो गए और पूछा, “ऐसे लोगों को कैसे पहचानें?”मैंने कहा, “पहले समझिए कि आपके कर्मचारियों की मूल ज़रूरतें क्या हैं। अगर आप अपना व्यवसाय चलाना चाहते हैं, तो ऐसे उम्मीदवार चाहिए जो काम करें, क्योंकि काम के बिना व्यवसाय नहीं बढ़ेगा। आपके लिए सबसे जरूरी प्रोफ़ाइल वाले पद के लिए साक्षात्कार कीजिए और केवल उन्हीं को चुनिए जो काम और जिम्मेदारी से परिचित हों। बाकी बातों को नजरअंदाज करना होगा ताकि आपका ध्यान भटके नहीं।“”इसीलिए इंटरव्यू लेते वक्त आंखें बंद कर के ध्यान केंद्रित करें ताकि मन भटके नहीं, और आप सही फैसले पर पहुंचें। हो सकता है उम्मीदवार सुंदर न हो, या बहुत अच्छी CV न हो, या कपड़े ठीक न हों, पर आंखें बंद रहने पर आपका ध्यान उनके जवाबों पर रहेगा, जो सबसे ज़रूरी हैं।

“मैंने उन्हें कुछ सवाल सुझाए:

क्या उसे पता है वह कहाँ है?

इससे पता चलेगा कि वह आपकी संस्था के बारे में कितना जानता है और किसी कार्य को करने से पहले कितनी तैयारी करता है।

क्या वह बताएगा कि वह यहाँ क्यों है?

इससे यह पता चलता है कि वह इस संगठन से क्या चाहता है – सीखने के लिए आया है या सिर्फ नौकरी पाने के लिए।

यहाँ से आगे वह कहाँ जाएगा?

इससे व्यक्ति के विचारों और जीवन की व्यावहारिक दृष्टि का पता चलता है।अगर आपको इनके जवाब सही लगें तो उम्मीदवार को नौकरी पर रखें अन्यथा जब तक जवाब सही न हों, उम्मीदवार को न चुनें।

यह सलाह खास परिस्थितियों के लिए है, हर व्यक्ति पर आधारित नहीं।

 

 

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