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The way to succeed, saflta ki seedhi

वो कहते हैं कि जो अपने मां-बाप की सेवा नहीं कर सकता, उसे कभी सुकून नहीं मिल सकता। वो कहते हैं कि पिता के जूते के नीचे सुकून होता है और दामन के ऊपर। वो कहते हैं कि मां के सीने से लगकर जो सुकून होता है उसकी व्याख्या सही ढंग से नहीं बताई जा सकती। वो कहते हैं कि पिता के जूते के नीचे जो सुकून होता है वह दुनिया के तमाम सुखों पर भारी है।वे कहते हैं कि जब मुझे कहीं सुकून नहीं मिलता, मैं बेचैन रहता हूं, मैं जाकर अपनी मां के सीने से लग जाता हूं। वो कहते हैं मैं अपने सिर को तमाम चीजों से ऊपर रखता हूं, पर अपने पिता के पैर के नीचे वो कहते हैं कि वहां से ज्यादा सुकून मुझे कहीं नहीं मिलता।वो कहते हैं कि सभी को मुश्किलों और परेशानियों का सामना करना पड़ता है, सब बेचैन और परेशान होते हैं और सभी सुकून चाहते हैं, पर सुकून मिल केवल उन्हीं को पता है जो मां-बाप की सेवा करते हैं। वो कहते हैं मां के सीने से लिपटेगा नहीं जो पिता के पैरों को चूमेगा नहीं उसे सुकून मिल ही नहीं सकता। सुकून वहीं मां के आंचल में और पिता के पैरों के नीचे है।वे कहते हैं, “खान, जब तुम परेशान हो तो मां के सीने से लिपट जाओ, एक काम करो, पिता के पैर चूम लो, तुम देखना परेशानियां खत्म हो जाएंगी।“

उनकी बातें मैंने कई बार अपनी जिंदगी में अमल की हैं और मुझे आराम मिला है।तो मैं यही कहूंगा कि अगर सुकून चाहिए हो तो मां के सीने लग जाओ या पिता के पैरों को चूमो। मानो या न मानो, यह आप पर निर्भर करता है।

रावाणियत में इस बार ऐसी request आई जिसमें हमारे दोस्त ने लिखा, “मैं बहुत जल्दी शादी करने वाला हूं, मेरी शादी एक अरेंज मैरिज है। वे इसी में जोड़ते हैं कि वे शादी के बाद भी अपने पिता के साथ ही रहना चाहते हैं, उन्हें छोड़ना नहीं चाहते। खान मुझे क्या करना चाहिए? कोई सलाह अगर तुम्हारे पास हो तो मेरे लिए बताओ।“

मैंने जवाब में लिखा कि मुझे बहुत खुशी है कि आप अपनी जिंदगी के इतने बड़े फैसले में मेरी एक सलाह को इतना जरूरी समझते हैं।देखिए इस बारे में सबसे पहले उनसे बात करना बेहतर है जिनसे आप शादी करना चाहते हैं या शादी करने के विषय में सोच रहे हैं, क्योंकि वे इस बारे में क्या सोचती हैं, उनका इस बारे में क्या सोचना है, वही सबसे ज्यादा मायने रखता है।

दूसरा यह कि जब एक लड़की किसी से शादी करके उनके घर जाती है तो वह उनके घर के रवैया, तौर-तरीके, बोल-चाल के ढंग से बिलकुल अनजान होती है। वह आपके घर आकर देखती है कि आप अपने माता-पिता के साथ किस तरह का व्यवहार रखते हैं। फिर वह उसे सीखकर वैसा ही व्यवहार करती है। तो उन लड़कियों पर इल्जाम लगाने से बेहतर है कि आप अपने माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार रखें, ताकि वे देखें कि आपके लिए आपके माता-पिता की कितनी कद्र है। साथ ही वह उस व्यवहार को सीखें, और फिर वे भी वैसा ही व्यवहार उनके साथ करें।

 

 

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