How to achive our goal, what is attitude,
हमारे एक क्लाइंट हमें अपनी रिक्वेस्ट में लिखकर भेजते हैं कि –
Rk मैंने अपनी ज़िंदगी में बहुत सारी किताबें पढ़ी हैं, और वे सभी जीवन और सोच के बारे में हैं। वे सभी किताबें और लेखक, और इनके अलावा अन्य लोग कहते हैं कि ‘अटीट्यूड’ यानी रवैया सही होना चाहिए। तुम्हारा रवैया ही बताता है कि तुम क्या हो।’ खैर, मैं नहीं जानता… लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं किस तरह का रवैया चुनूं? मुझे आगे मार्गदर्शन दें।”
वे कहते हैं, इंसान अपने जन्म से कुछ नहीं होता, न ही अपने नाम से कुछ होता है, बल्कि वह अपने काम से अपना नाम बनाता है। वह अपने काम से अपनी पहचान बनाता है।
वेकहते हैं कि हम (सभी प्राणी) हमेशा कुछ न कुछ करते रहते हैं। कभी हम चलते हैं, तो कभी बैठे होते हैं, कभी हम बात कर रहे होते हैं, तो कभी बात सुन रहे होते हैं। वे कहते हैं कि हम हमेशा कुछ न कुछ करते रहते हैं। इसी में आगे वे कहते हैं कि सभी कामों को करते समय हमारी बॉडी हमारे कुछ इमोशन को एक्सप्रेस करती है। वह, जो हमें चलने में दिखते हैं, जब हम किसी चीज़ को लेकर कॉन्फिडेंट होते हैं, तो वह हमारी आँखों में दिखता है, हमारी चाल में दिखता है, वह हमारी बातों में दिखता है। जब हम अंडरकॉन्फिडेंट होते हैं, तो वह भी हम पर साफ़ झलकता है, हमारी बातों में दिख जाता है, हमारे बॉडी के पोस्चर से पता चल जाता है। इस तरह से बॉडी के एक्सप्रेस करने को ही ‘अटीट्यूड’ बताया जाता है। वे कहते हैं कि इंसान प्रत्येक एक्शन पर कैसे रिएक्ट करता है, इसे ही उसका ‘एटीट्यूड’ कह सकते हैं।
तो हमारी सबसे बेहतरीन सलाह यही है कि पहले यह फैसला करें कि आप क्या लगना चाहते हैं या क्या बनना चाहते हैं, और फिर यह पता करें कि जिनके जैसा आप बनना चाहते हैं, या जो आप बनना चाहते अटीट्यूड हैं, उनका अटीट्यूड कैसा होता है या वे कैसे रिएक्ट करते हैं।
बिल्कुल वैसा रखने से आप अपने गोल के और नज़दीक आ जाते हैं।